पश्चिम एशिया में सैन्य टकराव तेज, अमेरिका इस्राइल की संयुक्त कार्रवाई के बाद ईरान का जवाबी हमला New Report
पश्चिम एशिया में जारी तनाव अब खुले सैन्य टकराव में बदल गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्राइल द्वारा ईरान के कई ठिकानों पर संयुक्त हवाई हमले किए जाने के बाद ईरान ने क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की है। हमलों और प्रति हमलों की इस श्रृंखला से पूरे क्षेत्र में अस्थिरता गहरा गई है। कई शहरों में सायरन बजाए गए हैं, हवाई हमले की चेतावनियां जारी की गई हैं और सुरक्षा एजेंसियां उच्च अलर्ट पर हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने की अपील कर रहा है, जबकि संयुक्त राष्ट्र स्तर पर कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।
नेतन्याहू और ट्रंप के बीच बातचीत
इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच हाल ही में फोन पर बातचीत हुई। इस्राइली प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार दोनों नेताओं ने मौजूदा सुरक्षा हालात, ईरान की सैन्य गतिविधियों और आगे की रणनीति पर चर्चा की। हालांकि बातचीत के विस्तृत बिंदुओं का सार्वजनिक खुलासा नहीं किया गया है।
संयुक्त राष्ट्र में कूटनीतिक हलचल
ईरान ने इस सैन्य कार्रवाई को आक्रामक बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। ईरान ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस को पत्र भेजकर कहा है कि अमेरिका और इस्राइल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और इसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। बढ़ते संकट को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाई गई है। न्यूयॉर्क में आयोजित इस बैठक में 15 सदस्यीय परिषद क्षेत्रीय सुरक्षा, संभावित युद्धविराम और तनाव कम करने के उपायों पर विचार कर रही है। रूस और चीन ने बैठक बुलाने की पहल की जबकि फ्रांस, बहरीन और कोलंबिया ने इसका समर्थन किया।
यूरोपीय देशों की यात्रा सलाह
तनावपूर्ण हालात को देखते हुए जर्मनी ने बहरीन, इराक, इस्राइल, जॉर्डन, कतर, कुवैत, ओमान, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात की यात्रा को लेकर अपने नागरिकों के लिए चेतावनी जारी की है। जर्मन विदेश मंत्रालय ने क्षेत्र में बढ़ती सैन्य गतिविधियों और संभावित सुरक्षा जोखिमों के मद्देनजर गैर जरूरी यात्रा टालने की सलाह दी है।
ईरान का रुख और वार्ता की संभावना
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिकी मीडिया को दिए साक्षात्कार में कहा कि फिलहाल दोनों देशों के बीच सीधा संवाद नहीं हो रहा है, लेकिन यदि अमेरिका बातचीत चाहता है तो रास्ते पूरी तरह बंद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि ईरान की सैन्य कार्रवाई क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों तक सीमित है और नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जा रहा। अराघची ने शासन परिवर्तन की किसी भी कोशिश को अव्यावहारिक बताया और कहा कि हमले रुकने की स्थिति में ईरान वार्ता के लिए तैयार है। उन्होंने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के जीवित होने की पुष्टि भी की और कहा कि वे राष्ट्र को संबोधित करेंगे।